अहसास हुआ जब मुझे बीत रही जिदंगी इस रोटी ,कपड़ा और मकान मे सीमट कर रह गई जिदंगी तेरे अहसानो मे... नींद से जागे खुद से किया सवाल क्या माँ-बाप की शिक्षा का इतना ही है मोल  सब मुझसे  मांगते हैं मेरी मुस्कुराहट सबके काम कर दूं बिना किसी हिचकिचाहट...  जो सही करने को तैयार हूं मे गलत काम पर कैसे लगा दो अपनी मोहर में आहत होते हैं मेरे जज्बात  सिमट के रह गई कहीं तेरी हर बात में...