भरी दुपहरी जब लोटा घर ठड़ा पानी बोल निशब्द हो गया
नही मिला तो घड़े का पीकर सो गया...
उनके लगा जाने किस बात पर ये इंसान रूठ गया।।
भीतर का आलम भी कुछ जब रूह को कोई बात गहराई मे चुभ जाती है.....
इंसान निशब्द हो जाता है जो मिलता है़ उसमे संतुष्ट हो जाता है।