फर्श पर बिखरा मुट्ठी भर अनाज चल दिया इंसान उस पर... होता बोरी भर तो समेट लेता.... भूल गया इस बात को सुदामा का पेट एक चावल के दाने से भी भर गया था।।। इस दुनिया मे तो  चलती एक कहावत है तो ईद नही तो रोजा।।