पेड़ कह रहा है बारिश की तेज बौछार कितना ही मेरे कितना ही मेरी डालियों को झुका दे पर....

उस पर नई कलियों का खिलना बंद नहीं होगा

ISI Tarah Insan Keh Raha Hai

तू झुकता जा अगर तुझे कोई झुका है तो

Teri sundarta Phir Bhi kam nahi hogi

तेरे नए विचार terii muskarahat Ko koi bhii

terii izzazat Kay Bina layy NHn Sakta..    

 

 

 hii