जब खामोशीया बातो करता है तब शब्दो की कहाँ जरूरत होती है.... आँखो ही आँखो मे हसरतो को मुक्कमल जहाँ मिल जाता है तब किसी की रजामंदी की कहाँ जरूरत होती है ये वो पाक मोहब्बत जिसमे दो दिल जन्म जन्मांतर के लिए एक दूसरो के हो जाते हैं..