चिड़िया आज फिर आई है पुरानी डाल पर....
बड़ा चहचहा ररही... जैसे छुटी हो जैसे किसी पिंजरे से....
कभी किसी डाल पर कभी किसी डाल पर...
दाने पानी की नही परवाह हर पंछी से बतियाती ....
कुछ ललगती उस स्ञी जैसी जो मायके मे चंचल हो जाती
ऐसी लहराती जैसे खुशियो के पंख लग गए हो...