दुनिया मै जब कदम रखा... सांसो की लगाम तुमने थामी माँ....   रोते हुए आए हम हँसना तुने  सिखाया माँ.. पहला  निवाला तुमने खिलाया माँ...   घुटने बल चल देख बड़ा खुश हुई तुम उंगली थाम चलना सिखाया माँ....   अच्छा बूरा मै नही जानता था... तेरी आँखो से दुनिया देखा... जो तुने सिखाया वो ही मैने कर दिखाया माँ....   जैसा भी हुँ तेरा आईना हुँ मैं माँ.. जब-जब तु नाराज मेरे दिल पर भी बादल छाए अश्क तेरी आँखो मे  थे पर बहाए मैने भी माँ... हर बूरे काम का पछतावा लिए हम भी घूमे..   घर के बाहर की दुनिया तुने दिखाई बह गया नदी की धारा की तरह मे मिल गया दुनियादारी के समुद् मे माँ....   भूल गया तेरे अहसानो को ... जीने लगा था अपनी जिदंगी पर जब भी ठोकर खाई... आवाज मुहँ से एक ही आई माँ...   लोट आया हुँ वापस तेरे पास बस तेरा हुँ माँ... पर क्यु तुम पत्थर हो गई कुछ नही बोलती पता.है तुझे समझदार हुँ मै समझता हुँ सबमे माँ....   नेक, पाक, इज्जतदार,व विनम् धनी बनुगाँ मै माँ... एक दिन गरव करोगी तुम.. जब तेरा नाम लेकर कँहुगा मैं इस माँ का हुँ ।.  बेटा....