हमारा किसान कितनी मुश्किलों से गुजरता है सारा दिन खेत में काम करता है रुखी सूखी खा कर अपना पेट भरता है हम तक पहुंचाने अन्न के लिए वह कितनी मेहनत करता है अरमान नहीं उसे शहरो का    अपने परिवार के पालन पोषण के लिए करता है मिल जाती है उसको मुंह मांगी कीमत खुशी से झूम उठता है उसका भोला-भाला चेहरा हर चलचित्र दिखता है भाव तोल ना कभी किसी गरीब से करना कि उसकी हर   शय मेहनत से उपजी है।।