कर्ज तो ले लिया चुकाउ कैसे
दिखावा तो कर लिया गरीबी छुपाऊं कैसे.....
इज्जत उछाल जाएगी उनके साम़ने जो. करते हैं
बहुत सम्मान ...
अपनों की याद आती है तो सोचता हूं सूली प चढ़ जाऊं
कैसे....
ठोकर तो खाली अब अपने आपसे फिर से मिलना चाहता हूं
चांद की तरह फिर से चमकना चाहता हूं
दाग तो उस पर भी है बदनाम तो वह भी हुआ था
यही को सही सोच कर अब कदम आगे बढ़ाना चाहता हूं......