हर तरफ फैली दर्द की कहानियाँ
खुशीयों तो है़ एक मायाजाल जिसकी चाह मै ना जाने कितनो ने अपने आप से सौदा किया कभी खुद की खशी के लिए तो कभी अपनो की....
पैसा, प्यार, मोहब्बत ना जाने किससे इसे खरीदने की कोशिश की.....
ईश्वर ने भी ना जाने कहाँ छुपा के रखा जहाँ सब ना पहुचँ पाए....
कोई औलाद मे ढूढ़ता कोई चीजो....
टूटता बिखरता जब सब कुछ जब होता बेइन्तहा दर्द का अहसास....
तभी दिल के किसी कोने मे चुपके से निकलती एक किरण ....
कहती मे ही हू खुशी क्यो ढूढ़ता है़ यहाँ वहाँ मैं तुझमे ही छुपी हुँ...
तु मुस्करा हर गम पीजा....
तेरी मुस्कराहट ना जाने कितनो के दर्द मिटा सकती हैं.....