जाने कैसे काटेगा अपनी जिंदगी.. जिसका दिन दूसरों की खामियां गिनने मे गुजर जाता है दूसरों पर कीचड़ उछालते उछालते ना जाने  कब छीटें खुद पर भी आ जाते।। वक्त के साथ सोच बदलती है दुनिया बदलती है हां इंसान भी बदलता है और वो पगला अभी भी हर इंसान को..... उसी पुराने नजरिए से देखता है ।।