जाने कब से ढूंढ रहे हैं धरती पर अपना अस्तित्व  किस लिए रखा है ईश्वर ने रचा ये  खेल  कब तक निभाएंगे अपना किरदार बुद्धि की डोर थामे बैठा है वह  कब तक फेरबदल करता रहेगा ... हम खिलौना उसके हाथों का न जाने कितना हो खेलता रहेगा ....... अपने आप में जो ढूंढा किसी को तुमने हर बार तोड़ दिया उसी को .... जाने कब तक के खेल चलता रहेगा  जाने कब त क ईश्वर कठपुतली की तरह नचाता रहेगा।।।