दरद से अजीब रिश्ता है़ हमारा.... जब हम मुस्कराते है़ तो रोने लग जाता है़ इसके रोने की आहट से शणभंगूर हो जाती है़ खुशीया....? गम मै हमे भी डूबो लेता है़ बना लेता है़ अपना दोस्त आईना मे देखते खुद को दिल मे. खुशीयों का सागर नजर आता है़.... हम फिर से मुस्करा उठते है़ ..तोड़ देते है़ रिश्ता दरद से पर..... कमबख्त ये हमारा पीछा ही नही छोड़ता है़.....