ना जाने कैसा एहसास होता है तेरे पास ना होकर भी हमेशा तेरे साथ रहता है धूप में परछाई बनकर दिखता है अंधेरे में तुझे अपने पास बुलाता है । कोई तो है जो चुप चुप कर तेरी हर बात सुनता है। कोईकोई तो है जो तेरी जिंदगी का लेखा-जोखा लिखता है तू कहता है जिसको भगवान जिसकी तू पूजा मंदिरों में करता है।। वह कहीं और नहीं तुझमें ही कहीं रहता है हर हर गलत पर आवाज उठाता है।।