कितना बेबस हो जाता है इंसान जब वह कहना कुछ और चाहता है और कह कुछ और देता है अपनी तमन्नाओं पर खुद ही पानी फेर देता है अक्सर ऐसा उसी इंसान के साथ होता है जिसे खुद पर भरोसा नहीं होता जो अंदर से कमजोर होता है..... अपनी इस बेबसी को ढंग से प्रकट भी नहीं कर पाता और क्रोधित हो जाता..... उसकी कमजोरियों को नजरअंदाज कर ऐसे साफ दिल और सच्चे इंसान तो कोई विरला ही समझ पाता....