ना जाने क्या हुआ रूह को ये खुद मे ही मशगूल हो गई है... मन को भी बहाना मिल गया कामचोरी का.... पुराने बातो के बवड़र मे फंसते, उससे पहले अवचेतन मन ने जगा दिया...