दर्द  से अजीब रिश्ता है़ मेरा कमबख्त पीछा छोड़ता ही नहीं  है हथियार का वार एक बार जख्म देता है... शब्दो का वार बार बार देता है।। सहनशीलता दम तोड़ उससे पहले हे इश्वर तु विराजमान हो जा.. अपने आप से जो संघरष चल रहा उसे खत्म कर मुस्कराहट को मेरी ढाल बना दे झूठी ही जिदंगी काट तो सकेगे।।।