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आंचल


दुनिया सिमटकर जिसके आंचल में रहती थी। जिससे मैं अपनी हर बात कहती थी। क्रोध को मेरे चुपचाप रहती थी मेरी एक जिद पर अपनी सौ काम ।छोड़ देती थी वह मेरे बचपन की अम्मा थी....

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