अम्मा का आँचल है बड़ा प्यारा जिसके साये मे गुजरा बचपन  मेरा सारा पाना की छीटें जब चेहरे पर पड़े पोछनें को याद आए आँचल तुम्हारा।। बिस्तर पर जब नींद ना आए तब याद आए अम्मा वो आँचल तेरा।। बिना  मांगे तुझे पता चल जाता क्या चाहिए मुझे वो था बचपन मेरा।। ना जाने क्यु अब रूठ गई हो ना वो आँचल थमाती ना गले से लगाती हो बड़ा मन करता है़ पर तुम पता नही क्यु तुम मेरे पास नही आती हो।। माना सिखा रही जीना तुम्हारे बिना यकिन मानो नही आएगे मायके दहलीज पर बार-बार क्यु सुनाएगी दुनिया  ये ताना ।। माना तुम समझा रही हो बड़ा होना हमारा बड़ गया है परिवार तुम्हारा रह गया अकेला ये दिल हमारा संभाल रही हु मै भी अपना परिवार पर मुझमे भी झलकते संस्कार तुम्हारे।। हुई कोई गलती तो माफ करना कहना सकी शब्दो में तुम्हारे सामने इसलिए लिख दी ये कविता पढ़ ली अगर तुमने तो समझेंगे तुम तक पहुचँ गई मेरे दिल की बात।।