वक्त रेत की तरह हाथो से फिसल रहा है़।.....
हम अभी मुटठी बदं कर सोच रहे आगे क्या करना है़।...
किसी राह की तलाश मे कदम उठ नही रहे ।
थमे हुए वही खड़े किस्मत को दोष दे रहे है।....
कभी किसी पर अपनी नाकामी का दोष थोपते है़
तो कभी खुद से ही नाराज हो बैठते है़।
चाहत भी अरमान भी है़ पर कमबख्त दिल रहता परेशान भी है़।.....
इसकी परेशानी कारण पता भी है़। पर खुद पर नियत्रण नही ये हमारी खता भी है़।......
जुबान पर तलवार वार को है़ तैयार .....
कोई कुछ कहे हम सुनने को तैयार नही है......
इसे दिल की बेअदबी कहो या खुली किताब....
हमारी कमियो का कोई हिसाब नही है.....
सारी कहानी रख दी सामने हो कोई बेहतरीन उपाय दे देना......
लिखा हुआ पढ़ लेगे.... जुबान से कहे शब्दो पर हमे ऐतबार नही.....
इसे हमारा अभिमान कहो या जीवन की सच्चाई