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तन्हाई


महफिलों के कारण घर से निकल जाता था,अब बंद कमरों में तन्हा यहां से वहां डोलता हूं ।

पहले दस्तकों से भी परेशान था मैं,अब पडोसी के घर पे पडी दस्तक पर, अपना दरवाजा खोलता हूं।।

— दिगंत
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