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पतली गली !


मैं आगे नहीं बढ़ा, वह पीछे मुडके चल लिए ..इरादे पक्के थे, उन्होने अपने इरादे बदल लिए..

रे फरेबी कितना पुकारा मदद को,मेरी चींखे सुन, वह पतली गली से निकल लिए।।

— दिगन्त-
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