दिल्ली की हालत दूर से ही दिखाई देती है,
हालत के ज़िम्मेदार, हालात पर ही तरस खाते हैं।
तेरा शहर भी उसी दिशा में
शान से, चुपचाप बढ़ रहा है—
जैसे विनाश भी कोई उपलब्धि हो।
तेरा शहर भी उसी मोड़ पर खड़ा है,
जहाँ सवाल पूछना
असभ्यता समझी जाती है।
यहाँ शोर को सच बना दिया गया है
और ख़ामोशी को सहमति।
दूर नहीं है तेरा सहर
बन रहा है धुएं का नगर
ज़हर को धीरे-धीरे
रोज़मर्रा की आदत बना लिया गया है,
और जब साँस अब भी चलती है—
लोग कहते हैं,
देखो, चमत्कार हुआ है।
#dibyashreepens

