अपने हिस्से कि धूप के लिए उसे रोज लड़ना है
अपने टुकड़े आसमाँ के लिए उसे रोज लड़ना है
जिवन के सारांश में संघर्ष बेशक है
अपना सिर ऊँचा रखने के लिए उसे रोज लड़ना है
समझदारी उसे निभानी है ज़रूर
उस थोड़े से बचपने को बचाने के लिए उसे रोज लड़ना है
बरसती बूंदे कई है
उस एक मुस्कान को संभालने के लिए उसे रोज लड़ना है
अपने हिस्से कि धूप के लिए उसे रोज लड़ना है


