नाप-तोल के बनते है सभी रिश्ते आज कल
संसार के इस गणित में थोड़ी असफल सी रही मैं
चाह कर भी ना जोड़ सकी हिस्सा किसीका मैं
टुकड़ा टुकड़ा सब में बटती रही मैं
सवाल क्या है यह तक ना बुझ पाई मैं
जवाब तक फिर क्या ही पहुंच पाई मैं
नाप-तोल के बनते है सभी रिश्ते आज कल...
