गांधी नेहरु वाली तड़पन दिखने लगी किताबों में ।राजगुरु आज़ाद की बातें होती केवल ख़्वाबों में ।भगत सिंह औ शेखर का परिहास बनाया जाता है ।संसद में आतंकी बोल इतिहास बनाया जाता है ।छलक रहे जो बोस के आँसू उसका भी प्रतिबोधन है ।अब के चोरों को भी देखो नेता का सम्बोधन है ।जगते रहना देश के वीरों संसद अब शर्मिन्दा है ।झाँसी वाली तलवारें सुन लाडो अब भी ज़िन्दा है ।हाथों में ले मधुशाला औक़ात पूछने आएँगे ।शेखर ने क्या दिया हमें सौग़ात पूछने आएँगे ।रख गर्दन पर शमशीरें तुम उनको भास करा देना ।खप्पर वाली रणचण्डी का तुम एहसास करा देना ।अरे नालायक़ बेशर्मों तुम हमें बताने आए हो ।राजगुरु की बरसी पर तुम शोक जताने आए हो ।भय छोड़ भयभीत करो उन भारत के ग़द्दारों को ।जिसने छिन लिया है तेरे उन मौलिक अधिकारों को ।धरती पुत्र ये भैंस चुराने वाले जब कहलाएँगे ।भगत सिंह को आतंकी वो बोल बोल तड़पाएँगे ।चौसर पर तुम रख ना देना उस केसर की क्यारी को ।सहते देखा है कितने अपमान देश के नारी को ।दिलों में उनके सिंहों की वो ख़ौफ़ ज़रूरी भरना है ।राष्ट्रविरोधी हमलों से ना अब भारत को डरना है ।छप्पन इंची वाले सिने से हमको उम्मीद बची है ।जिसने दुश्मन की चौखट पर भारत की तस्वीर रची है ।