छोड़ दिया है दामन मेरा मेरे बेटे ने ।

दूर हो जाओ दोनों बोला मेरे बेटे ने ।


जिसको राजा बेटा कहकर रोज बुलाते थे ।

जिसका सर सहलाकर पूरी रात सुलाते थे ।

क्यों इतना कड़वा बोल दिया है मेरे खोटे ने ।

दूर हो जाओ दोनों बोला मेरे बेटे ने ।


गिरवी मेरे सपने मेरी इच्छाएं लाचार थी ।

उसकी दुनिया लगती मुझको मेरा ही आकार थी ।

कैसे धक्के मारे मुझको मेरे छोटे ने ।

दूर हो जाओ दोनों बोला मेरे बेटे ने ।


क्या करुणा का सागर उसका सुख गया होगा ।

बूढ़े कन्धों से उसका मन ऊब गया होगा ।

गले लगा ले माँ बोली ना समझा बेटे ने ।

दूर हो जाओ दोनों बोला मेरे बेटे ने ।


डर लगता है यहाँ पराये होंगे कैसे कैसे ।

घर ले चल तू मुझको मैं रह लुंगी जैसे तैसे ।

एक बार ना पीछे मुड़कर देखा बेटे ने ।

दूर हो जाओ दोनों बोला मेरे बेटे ने ।


सुखी अंतड़ियों की खातिर अब दो रोटी भी भारी है ।

जिसने उसको जन्म दिया है वो ही बना अनारी है ।

छूना चाहा उसको झटका मेरे बेटे ने ।

दूर हो जाओ दोनों बोला मेरे बेटे ने ।


✍ धीरेन्द्र पांचाल