कितना डिजिटल दौर हुआ है मत पूछो ।

2G चारा कोल हुआ है मत पूछो ।

कहते हैं बस चुप रह कर के देखो तुम ,

कैसे शाही कौर हुआ है मत पूछो ।


पीपल में क्यों बौर हुआ है मत पूछो ।

गुंडों का क्यों शोर हुआ है मत पूछो ।

जेलों में पकवान कहाँ से जाते हैं ,

कौन किसका सिरमौर हुआ है मत पूछो ।


भाषण में मौलिकता कितनी मत पूछो ।

जीवन की सार्थकता कितनी मत पूछो ।

घूम रहे हैं दिन भर सूट सफारी में ,

फटा जेब क्यों नंदू का है मत पूछो ।


आँगन का सरदार कहाँ है मत पूछो ।

कल का चौकीदार कहाँ है मत पूछो ।

झुलस रहा हूँ सपनों की चिंगारी से ,

दीपक क्यों गद्दार हुआ है मत पूछो ।


कैसा ये व्यापार हुआ है मत पूछो ।

मतदाता बेकार हुआ है मत पूछो ।

छीन लिए सब रोटी अपने हाथों से ,

यहाँ रोज इतवार हुआ है मत पूछो ।


✍ धीरेन्द्र पांचाल