शासन अउर प्रशासन के फिर याद गाँव के आइल बा ।

सबसे बड़का मुँहनोचवा ह फिर चुनाव में आइल बा ।


चालू भइल पलग्गी जबरी दूनो बेला गाँव में ।

पंडी जी भी मुर्गा बांटे घूम घूम के ताव में ।

लागे फिर से ओढ़ बिलरिया धूप छाँव में आइल बा ।

सबसे बड़का मुँहनोचवा ह फिर चुनाव में आइल बा ।


कहें सोमारू का हो चच्चा कइसन हव परिवार ।

ठर्रा देत के कहलन देखा करिहा जिन इनकार ।

बड़का बड़का स्टीमर अब छोट नाव में आइल बा ।

सबसे बड़का मुँहनोचवा ह फिर चुनाव में आइल बा ।


साँझ सबेरे जयरम्मी से काम चली न बात सुना ।

छत्तीस वोटर हमरे घरे मियन क उत्पात सुना ।

बेसी मुर्गा दारू खातिर अब्दुलवा भरुआइल बा ।

सबसे बड़का मुँहनोचवा ह फिर चुनाव में आइल बा ।


भयल चुनावी हल्ला सगरों मिल रहल हव गल्ला ।

बुलट लेके पहुँचल हउवे रामधनी क लल्ला ।

चर चर बिगहा वालन के भी तारू फिर चटकाइल बा ।

सबसे बड़का मुँहनोचवा ह फिर चुनाव में आइल बा ।


केकर केकर हाल बताईं सब के सब अझुराइल बा ।

मुँह फूलउलें मँगरू नाहीं उनकर सांख पुराइल बा ।

हम नेतन क दोष का दीं सब अपने में अफनाइल बा ।

सबसे बड़का मुँहनोचवा ह फिर चुनाव में आइल बा ।


✍ धीरेन्द्र पांचाल