बिगड़े ना बोल नाही अइसे दबेरा ।

मोदी जी आँख तनी हमनी पे फेरा ।


हमरा के चाही नाही मेवा मलाई ।

नोकरी के आस प्यास देता बुझाई ।

जिनगी के खोल जनि अइसे उकेरा ।

मोदी जी आँख तनी हमनी पे फेरा ।


बीतता उमिर अब पाकता डाढ़ी ।

रोईं अकेले बन्द कइके केवाड़ी ।

नइया उमिरिया के मारे हिलकोरा ।

मोदी जी आँख तनी हमनी पे फेरा ।


मुहर हव लाग गइल देहियाँ पे भारी ।

लम्पट आवारा सभे बुझे अनारी ।

जुआ ना दारू नाही गांजा क डेरा ।

मोदी जी आँख तनी हमनी पे फेरा ।


रोटी ना भात रात कइसे बिताईं ।

छोटकी बेमार बिया कइसे सुताईं ।

गऊवां के लोग कहें हम्मे लखेरा ।

मोदी जी आँख तनी हमनी पे फेरा ।


माई  के  सस्ता  दवाई  उधारी ।

ओहु पे चल रहल रउआ के आरी ।

मछरी के अस कस नाहीं दरेरा ।

मोदी जी आँख तनी हमनी पे फेरा ।

       

    ✍ धीरेन्द्र पांचाल