
फ़ुरसत मे कभी किसी रोज तुझसे,मिलते हैं ज़िन्दगी
शिकवे होंगे तुझे भी हैं मुझे भी,बात करते हैं ज़िन्दगी
अकेला थक गया हूँ मैं चलते-चलते तेरी राहो मे
कुछ पल के लिए ही सही,साथ चलते हैं ज़िन्दगी
वो जो लिखे थे मैंने तेरे नाम तनहायी मे
आ बैठ पास वो दो चार ख़त,साथ पढ़ते हैं ज़िन्दगी
ना मै तेरा क़ातिल ना तुझे दुश्मनी है मुझसे
फ़ि
Read More! Earn More! Learn More!
