याद आता है बचपन का लम्हा वो सारा वो गांव की खुशियाँ वो खूब चंचल नजारा वो मेले मे जाना वो जाके खूब मुस्कुराना माँ की उंगली पकड़ के वो शय को दिखाना माँ का उंगली दबाके वो आंखें दिखाना अपनी जिज्ञासा दिल ही दिल मे दबाना याद आता है माँ का वो दिलाया गुब्बारा वो गांव की खुशियाँ वो खूब चंचल नजारा पौ फूट जाना वो माँ का जगाना वो आँखों को मीचे खुद को बिस्तर पे खींचे वो माँ का ग़ुस्सा फिर गालो को आँसू से सिंचे वो गर्मी की छुट्टी वो गांव के आम के बगीचे वो मामा के गांव की नदी का किनारा याद आता है बचपन का लम्हा वो सारा याद आता है बचपन का लम्हा वो सारा वो गांव की खुशियाँ वो खूब चंचल नजारा