संदेह
संदेह के बीज को
मत फैंकना
अपने मन की
ज़मीन पर।
नफ़रत की बारिश
और क्रोध की गर्मी से
कहीं फूट न पड़ें
अंकुर इस से।
पनप न जाए
ऐसा पौधा,
जो कर दे
मन को आहत
शब्दों को विषाक्त
और तन को लहूलुहान।
जिसके फूल को
सूंघने भर से
मर न जाए
एक प्यारा सा रिश्ता।
संदेह के बीज को
मत उगने देना
अपने दिल के
आंगन में.....
** धीरजा शर्मा**
