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वाह उस्ताद


उस्ताद कर रहे मिन्नतें हजाररात बीत गई अब बक्श दीजिएहाज़िरीन कर रहे थे सवाल-ए-मुकर्ररपीर ने कहा बस भी कीजिएशागिर्दों की चाह ने पिघला दियाछेड़ी तान तो महफ़िल रंगीन कर दिया

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