"जनाब कुत्ता ,कुत्ता जनाब "
जनाब कितने पानी में है सब जानू ,
कितने खरे कितने खोटे ये भी जानू ,
जनाब की अक्कल गई है घास चरने,
खुद को समझे अक्कल का थाने दार,
खरी-खरी जो कहता हूँ तो जनाब की
नजरो में मै ही मुजरिम कहलाऊँ,
बात क्या है,कोई पूंछे तो बतलाऊँ ?
जनाब को लगता है उनकी नाक है ऊपर,
यह मोहल्ले भर को कैसे बतलाऊँ,
जनाब है सबसे अमीर रुतबेदार,
अमीरियत का डंका कैसे बजबाऊँ,
फलाने से फलाने साहब !!!
कह कह कर ही पुकारा जाऊँ।,
जनाब ने एक तरकीब निकाली ,
सर पे हैट पैर में बूट पहन रोज सबेरे ,
रौब दिखते कुत्ता टहलाने निकलते,
कुत्ते की भी शानो -शौकत देखो,
उसके लिए भी फैंसी ड्रेस बनवाई ,
कुत्ता तो कुत्ता है पेड़ पे या ,
गाड़ी के टायर पे लपक के मूतेगा,
साफ-सुथरी जगह देखि नहीं ,
६९ डिग्री पोजीशन पे टट्टी करेदेगा ,
जनाब ने कुत्ते को हर अदब सिखलाई ,
जनाब की तरह ही कमोड में टट्टी -पेशाब करे,
बस यही बात उसके भेजे उतर नहीं पाई ,
गरीबो पर रौब झाड़ता,मुँह फाड़ के ऐसे दौड़,
जैसे सड़क भी जनाब के बाप ने ही बनवाई ,
जनाब का कुत्ता भी जनाब की भाषा बोले,
जनाब ने कुत्ते को फर्राटेदार अंग्रेजी रटवाई,
जनाब ने कुत्ते का नाम भी अंग्रेजी में रखा है ,
बिलायती कुत्ता है हिंदी वो खाक समझेगा ?
हाय!हेलो!गुडमॉर्निंग ! हाउ डु यू डु !कहने पर ,
लार टपकायेगा फिर गोल-गोल पूंछ हिलायेगा ,
क्या जनाब कभी साहब बन पायेंगे ,
या कुत्ते की सोहबत में कुत्ता ही बन जाएंगे ?
ये हम और आप कैसे बताएँगे ?
जनाब ,जनाब के मोहल्ले वाले ही बताएँगे ?
क्या नामदारी की जकड,जनाब की अकड़ ,
और कुत्ते की पूंछ कभी सीधी हो सकती है ?
क्या कुत्ता जनाब है, या जनाब ही कुत्ता है,
इन दोनों बातों में कोई अंतर है ? । "
~धर्मेंद्र मिश्रा ~
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