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प्यास


न जाने कैसी ख़लिश,कैसी प्यास है,हर किसी को किसी न किसी की तलाश है,मन के वीराने में हर कोई अकेला है,यही जीवन का अतरंगी खेला है,पा ले इंसान दुनिया में कुछ भी,फिर भी हाथ खाली और आंखों में आस है ।।

धर्मेंद्र20.3.25

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