दो जन मिले,
एक चाँद, दूजा चकोर।
घनघोर अँधेरी रात में,
हुई चाँदनी चहूँ ओर।
नित निहारूँ, तुझे पुकारूँ,
मैं हूँ तेरा मित्र चकोर।
बादलों संग स्वांग रचाता,
चाँद बना है चित्तचोर।
दूर कहीं किसी कुटिया में नन्हीं बिटिया है इठलाती।
अपनी कुतिया 'मोरी' संग अपना जी वो बहलाती।
लोरी सुनाती, निंदिया लाती।
शून्य-सी आँखों में ढ़ेरों सपने भर जाती।
चंदा-मामा की पालकी में सातों रंग है सजाती।


