पता है क्या? नए किस्से आये है...
सुना है अपने साथ पुराने ख़त भी लाये है।
स्याही कुछ फैल सी गई है,
कागज़ भी जर्जर सा लगता है।
अक्षर भी ज़रा मिट से रहे है,
लगता है अश्कों से टकरा रहे हैं।
धुंधले ऐनक को चमकाते हुए
हर वो बोल भी गुनगुना रहे है।
बिन कही उन हरेक बातों से
नई यादों को महका रहे है।


