लिबास में ऐसे में पड़ी रही
कफ़न हो शायद ये सोच रही
ताउम्र देता गया धोखा वो
मैं प्यार में पीड़ा सहती रही
वो दर्द बन कर मेरी जिंदगी में आया
मैं मरहम पे मरहम लगाती रही
जज़्बात भी तो क्या बयां करु अब
वो मुझे रुला गया बात अब क्या करु
दुख इस बात का नहीं कि वो मिला नहीं मुझे
दर्द इस बात का है के वो भुला गया मुझे
ज़ख्म बोलते नहीं है फिर भी पीड़ा तो देते है
छोड़ चले गए हमको वाह,ये भी क्या हद करते है।
Neha dhanuka ?
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