ये जिंदगी इंतहान सी है
तू नहीं है तो मशान सी है
आह जिंदगी
उसके बिना हम तुझे निभा न पायेंगे
अफसोस,
तर्क-ए-ताल्लुक ही उसकी पहचान सी है
मेरे अहसास की
अल्फ़ाज़-तर्जुमानी क्यों नहीं होती
जबकि वो रब
उसकी बातें इबादत
वफ़ा ईमान सी है
ऐ जिन्दगी
मुझ पर रहम आए
तो उससे सिफारिश करना
जिसकी सूरत मेरे भगवान सी है।
ये जिंदगी इंतहान सी है
तू नहीं है तो मशान सी है।।


