ऐसे तो आते नहीं हो

याद में ही आ जाओ


कुछ बातें हैं,परतदार

जो कहने के अभाव में

अब चट्टान होने को हैं


तुम्हारे भी दिल में

दबी हो शायद

ऐसी ही कोई टीस

चुभती हो दिन-रात


सुनते हैं

सांसे लोहा पिघला देती हैं !!


भले ख्वाब में ही सही

इससे पहले कि

कायांतरण और कठोर हो जाय 

मिलो..........