कहीं पहुँच पाये तो बड़ी बात तो होगी ही

ऐसे भटकन भी अपनी कम कीमती नहीं


जो मिला है राह में मंजिल में कहाँ मिलता है

प्यास सहरा की दरिया से कम कीमती नहीं


ये रतजगे, बे-ख़याली, बेबसी, घुटन-टूटन

सब पीर के लोहबान हैं कम कीमती नहीं