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भटकन


कहीं पहुँच पाये तो बड़ी बात तो होगी हीऐसे भटकन भी अपनी कम कीमती नहीं

जो मिला है राह में मंजिल में कहाँ मिलता हैप्यास सहरा की दरिया से कम कीमती नहीं

ये रतजगे, बे-ख़याली, बेबसी, घुटन-टूटनसब पीर के लोहबान हैं कम कीमती नहीं

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