गौरव की भाषा नई सीखभिखमंगो की आवाज बदलसिमटी बाहों को खोल गरुड़अब उड़ने का अंदाज बदल ।अब नही गांव में भिक्षु औरदिल्ली में कोई दानी हैतू दास किसी का नहींस्वाधीन देश का प्राणी है ।**देव शंकर झा**
गौरव की भाषा नई सीखभिखमंगो की आवाज बदलसिमटी बाहों को खोल गरुड़अब उड़ने का अंदाज बदल ।
अब नही गांव में भिक्षु औरदिल्ली में कोई दानी हैतू दास किसी का नहींस्वाधीन देश का प्राणी है ।
**देव शंकर झा**