चल पड़ा मैं भी उधर ही,
जिधर से जा रहा था कारवां ||
अंतत: चलते चलते
इक श्मसान तक मैं आ गया ||
देखा नजारा जो वहाँ का
मेरे कुछ भी समझ आया नहीं ||
यहाँ तक आने को इतनी ज़द्दोज़हद
मैं यह सोचकर चकरा गया ||
जलकर राख मे मिल रहे थे-
वे लोग जो खुद सिकन्दर कह रहे थे .
पल भर में मेरे देखते ही देखते
माटी का पुतला माटी में मिल गया ||