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*मुक्तक*


इक रोज अचानक मैं बिमार पड गया || मुझको मुहब्बत का था बुखार चढ़ गया|| आए हकीम वैद्य भी न कर सके इलाज || चप्पल पडी जो माँ की मैं ठीक हो गया ||

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