चुप्पी तोड़ो, कुछ तो बोलो करोगे कितना और सहन|| जलते हैं धू धू कर घर सारे , हो रहे मासूमों के रोज हवन|| कैसी लाचारी है राजा की , मुस्किल मे दिख रहा मेरा वतन |1| . बंगाल से लेकर यूपी तक चहुँओर सियासी दंगे हैं || दोषी को निर्दोष करार दिया जाता , निर्दोषी को कहते गुण्डे हैं|| कब तक रहना मौन हमें  , अब करना होगा कोई और जतन|2| चुप्पी तोड़ो कुछ तो बोलो , करोगे कितना और सहन ||