यहां राजतंत्र का राज नहीं, यहां लोकतंत्र का नारा है,
जो जनमानस समझ ना सका, वो हरेक नेता हारा है।
जनता ने चुना कि काम करेगा, नेता मलाई चाट रहा,
अब उसको ना मौका मिलेगा, जनता ने ही नकारा है।
अपनों खातिर है सब जायज, जन की लेता सुध नहीं,
अबकी आया वोट मांगने, जन ने मिलकर दुत्कारा है।
जो काम करेगा जनता के, वह दल सरकार बनाएगा,
जिसको चढ़ा नशा सत्ता का ,वो फिरता मारा मारा है।
जन को मूर्ख समझना छोड़ो, जन औकात दिखा देगी,
जनता को तेरी नहीं जरूरत, तेरा तो जन ही सहारा है।
कहे अरविन्द सुनो नेताजी, जनता हिसाब अब मांगेगी,
शासन जन का जन की खातिर, ये जन का जयकारा है।
©️देवकरण गंडास "अरविन्द"


