छोड़ दी पतवार जिसने और नौका भाग्य सहारे,

बस मन्नतें जो मांगता है और ढूंढता है टूटते तारे,

उस इंसान की किस्मत उससे पहले सो जाती है

जो मेहनत करता ही नहीं और भाग्य पथ निहारे।


भाग्य उसी के साथ है, जो संघर्ष करता रहता है,

राह चाहे हो कठिन, परन्तु सतत चलता रहता है,

कर्म जैसे हैं इंसान के, वैसा ही भाग्य वो पाएगा

बदनसीबी - खुशनसीबी ये कर्म ही तय करता है।


कर्म तेरे हाथ में है और कर्म में ही विश्वास रख तू,

भाग्य का है फेर झूठा ,भाग्य से नहीं आस रख तू,

कर्म तुमने जो किए हैं , वो ही तेरी गाथा सुनाएंगे

कर्म का बन पुजारी, भाग्य को फिर दास रख तू।


©️देवकरण गंडास