राहों के कांटों से बचकर निकलने वालों,
हल्की सी चोट से टूटकर बिखरने वालों,
बदल गए हालात तो तुम जी ना पाओगे
मिट्टी के महल से, रेशा रेशा ढह जाओगे।
जीवन हमेशा नहीं रहता है एक सरीखा,
वक़्त के साथ बदल लो जीने का तरीका,
संग वक़्त के ना बदले, पीछे रह जाओगे
मिट्टी के महल से, रेशा रेशा ढह जाओगे।
©️देवकरण गंडास "अरविन्द"


