हमको तुम पर है अभिमान

जय किसान , जय किसान।


कहता है कोई तो कहने दो

तुम धान की गंगा बहने दो,

कोई समझ तुम्हें नहीं पाया है

अपनों ने ही तो बिसराया है,

पर तुम मत करना नाराजी

वरना संकट में होगी जान,

हमको तुम पर है अभिमान

जय किसान , जय किसान।


तुम से ही लहराई है धरती

फसलें झूम के बातें करती,

तुमने हर एक को प्यार दिया

धन धान्य का उपहार दिया,

खुद को धरती को सौंपा

राष्ट्र को दिया बेटों का दान,

हमको तुम पर है अभिमान

जय किसान , जय किसान ।


©️देवकरण गंडास "देव"